महाराणा प्रताप सेना के संस्थापक राजवर्धन सिंह परमार ने फेसबुक पर एक पोस्ट कर अजमेर दरगाह पर बड़ा दावा किया है। पोस्ट की गई उस तस्वीर को वर्तमान अजमेर की हजरत दरगाह के किसी हिस्से की बताई जा रही है। अब इस दावे को लेकर संगठन अध्यक्ष ने राजस्थान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र भी लिखा है।

पत्र के मुताबिक अजमेर स्थित हजरत ख्वाजा दरगाह एक प्राचीन मंदिर है। पत्र में दरगाह की दीवारों से हिंदू धर्म से संबंधित कमल के फूल और स्वास्तिक जैसे प्रतीक मिलने का दावा भी किया गया है। इतना ही नहीं, पत्र में ये अनुरोध भी किया गया कि भारतीय पुरातत्व विभाग से सर्वेक्षण भी कराया जाए। सर्वेक्षण के परिणाम स्वरूप हिंदू धर्म के प्रतीक मिलने के लिए भी आश्वस्त किया गया है।
दरगाह में स्वास्तिक के निशानों का दावा
लेटर में यह भी लिखा गया है कि दरगाह के अंदर कई जगहों पर हिन्दू धार्मिक चिह्न भी हैं, जिसमें स्वस्तिक के निशान को प्रमुख बताया गया है। उन्होंने लिखा है कि इसके अलावा भी हिन्दू धर्म से संबंधित अन्य प्रतीक चिह्न भी दरगाह में मौजूद हैं। आपको बता दें कि हाल ही में ख्वाजा गरीब नवाज का 810वां उर्स मनाया गया है। वहीं दरगाह के जानकारों के अनुसार इसका इतिहास 900 साल पुराना है लेकिन अभी तक के इतिहास में ऐसा कोई पुख्ता दावा नहीं किया गया कि दरगाह किसी हिन्दू मन्दिर को तोड़कर बनाई गई है।
इस पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, राजस्थान के राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी, अर्जुन मेघवाल और केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी को भी भेजा गया है। संगठन अध्यक्ष ने इस मामले को लेकर कोर्ट में कानूनी तौर पर अर्जी देने की भी बात कही है।