मनीषा शर्मा। वक्फ बिल को लेकर संसद में जारी बहस के दौरान बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने बिल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल आने वाले समय में एसटी-एससी और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए काले दिन के रूप में याद किया जाएगा।
2 अप्रैल को बताया ऐतिहासिक दिन
राजकुमार रोत ने 2 अप्रैल 2018 को हुए एससी-एसटी एक्ट में बदलाव और उस समय हुए आंदोलनों को याद करते हुए कहा:
“वर्ष 2018 में एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने का प्रयास किया गया था, जिसके विरोध में पूरे देश में आंदोलन हुआ। उस दिन जो शहीद हुए थे, उन्हें याद करना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के कानून विशेष समुदायों को निशाना बनाने के लिए लाए जा रहे हैं, जो देश के सामाजिक ढांचे के लिए घातक साबित होंगे।
देश में नफरत की राजनीति का आरोप
राजकुमार रोत ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान सरकार पर धार्मिक नफरत फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत विविधता में एकता का देश रहा है, लेकिन आज धर्म के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा:
“आज देश में वक्फ बिल, हिजाब, मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को उछालकर नफरत फैलाई जा रही है। इससे देश कमजोर होगा।”
मुस्लिमों के योगदान को किया याद
बांसवाड़ा सांसद ने भारत के इतिहास में मुस्लिम समुदाय के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि:
राणा सांगा के साथ हसन खां मेवाती ने खानवा के युद्ध में भाग लिया था, जिसमें 12,000 मुस्लिम सैनिक शहीद हुए थे।
महाराणा प्रताप के सेनापति हकीम खां सूरी थे, जिन्होंने अकबर के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई।
राणा पूंजा भील, जो एक आदिवासी नेता थे, उन्होंने भी महाराणा प्रताप का समर्थन किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतिहास में सभी समुदायों ने एक साथ मिलकर देश के लिए बलिदान दिया, तो आज क्यों धार्मिक आधार पर नफरत फैलाई जा रही है?
वक्फ संपत्तियों के व्यावसायीकरण का आरोप
राजकुमार रोत ने कहा कि वक्फ संपत्तियां मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और सामाजिक कल्याण के लिए दी जाती थीं, लेकिन अब उन्हें व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा:
“आज मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है, कल आदिवासी, दलित, ईसाई और गरीब हिंदू समुदाय की धार्मिक संपत्तियां भी निशाने पर आ सकती हैं।”
महिलाओं के मंदिरों में प्रवेश पर सवाल
उन्होंने वक्फ बिल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन इसके साथ ही सवाल भी उठाया कि:
देश के कई मंदिरों में आज भी महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित है।
महिलाओं को समान अधिकार देने के लिए सरकार को सभी धार्मिक स्थलों में समान नियम बनाने चाहिए।