शोभना शर्मा। राजस्थान के खिलाड़ियों और कोच के लिए 7 साल का लंबा इंतजार जल्द खत्म होने जा रहा है। राजस्थान सरकार जल्द ही महाराणा प्रताप और गुरु वशिष्ठ अवार्ड प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। शुक्रवार को खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने खेल विभाग के सचिव नीरज कुमार पवन के साथ बैठक कर इस विषय पर विस्तार से चर्चा की और पुरस्कारों को जल्द वितरित करने की योजना पर मंथन किया।
7 साल से नहीं मिले अवार्ड, एक पूरी सरकार का कार्यकाल निकल गया
खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में पिछले 7 साल से खिलाड़ियों और कोच को यह सम्मान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा,
“एक पूरी सरकार का कार्यकाल निकल गया, लेकिन हमारे प्रदेश के खिलाड़ियों और कोच को सम्मान नहीं मिला। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अब हमारी सरकार जल्द ही इन अवार्ड्स को वितरित करने जा रही है।”
महाराणा प्रताप अवार्ड प्रदेश के उन खिलाड़ियों को दिया जाता है, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया हो। वहीं, गुरु वशिष्ठ अवार्ड उन कोचों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देकर उनकी खेल प्रतिभा को निखारा हो।
अवार्ड्स की ईनामी राशि बढ़ाने की तैयारी में सरकार
खेल मंत्री ने बताया कि अवार्ड्स की पूरी प्रक्रिया में बदलाव किया गया है, और अब राजस्थान क्रीड़ा परिषद व खेल विभाग उन खिलाड़ियों और कोच की सूची तैयार करेगा, जिन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि,
“इस प्रक्रिया को अगले तीन से चार महीनों में पूरा किया जाएगा। इसके अलावा, इनाम की राशि बढ़ाने पर भी मंथन किया जा रहा है और इस पर जल्द ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।”
पुरस्कारों की राशि और आवेदन की स्थिति
वर्तमान में इन पुरस्कारों के तहत खिलाड़ियों और कोच को सर्टिफिकेट, मोमेंटो और 5 लाख रुपए नगद पुरस्कार के रूप में दिया जाता है। लेकिन 7 साल से यह अवार्ड नहीं मिलने के कारण सैकड़ों खिलाड़ी और कोच इंतजार कर रहे हैं।
अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों और 300 से अधिक कोचों ने इन पुरस्कारों के लिए आवेदन कर रखा है।
2018 में आखिरी बार दिए गए थे अवॉर्ड्स
राजस्थान में 2018 में आखिरी बार महाराणा प्रताप और गुरु वशिष्ठ अवॉर्ड दिए गए थे। तब गजेंद्र सिंह खींवसर खेल मंत्री थे। उन्होंने उस समय तक के बैकलॉग को खत्म कर पिछले सात सालों के अवार्ड एक साथ वितरित किए थे।
लेकिन इसके बाद 2019 से 2024 तक अवॉर्ड्स दिए ही नहीं गए, जिससे खिलाड़ियों और कोचों को केवल आवेदन भरने तक ही सीमित रखा गया।
अब राजस्थान सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम करने का निर्णय लिया है, जिससे योग्य खिलाड़ियों और कोचों को उनका हक मिल सके।
राजस्थान के खिलाड़ियों के लिए बड़ा फैसला
राजस्थान सरकार का यह निर्णय प्रदेश के खेल जगत के लिए एक सकारात्मक कदम है। यह न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने में भी सहायक होगा।
अब देखना यह है कि राज्य सरकार अपनी इस योजना को कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है।