मनीषा शर्मा। अजमेर में एडीए (अजमेर विकास प्राधिकरण) और डॉक्टर विवाद के बीच सस्पेंड किए गए जेईएन (कनिष्ठ अभियंता) के समर्थन में राजपूत समाज लामबंद हो गया है। समाज के लोगों ने सोमवार को एक रैली निकालकर कलेक्ट्रेट तक मार्च किया और बैरिकेड्स गिराकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद, जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम ज्ञापन सौंपते हुए जेईएन को बहाल करने की मांग की।
कलेक्टर पर दबाव बनाने का आरोप
राजपूत छात्रावास के अध्यक्ष सुमेर सिंह ने कहा कि जेईएन को सस्पेंड करने के मामले में समाज में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि डॉक्टर कुलदीप शर्मा का जिस प्लॉट को लेकर विवाद हुआ, वह वास्तव में उनका था ही नहीं। डॉक्टर द्वारा वहां जाकर सिर्फ फोटो खिंचवाकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की गई। इसके बाद, समाज और डॉक्टर को एकजुट कर कलेक्टर पर दबाव बनाया गया, जिससे जेईएन का निलंबन हुआ।
“जो लीडर नहीं था, उसे सस्पेंड किया गया”
समाज के नेताओं का कहना है कि इस पूरे विवाद को जातिवादी रंग दिया गया है। खास बात यह है कि इस घटना में जो व्यक्ति टीम लीडर नहीं था, उसे ही सस्पेंड कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके आदेश पर यह कार्रवाई हुई? जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन बिना उचित जांच के जेईएन का निलंबन कर दिया गया, जिसका राजपूत समाज विरोध करता है।
राजपूत समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी
राजपूत समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि तीन दिन के भीतर जेईएन का निलंबन वापस लिया जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा और प्रशासन इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
सामूहिक अवकाश और कर्मचारी संघ का विरोध
अजमेर विकास प्राधिकरण के कर्मचारी संघ ने भी जेईएन के समर्थन में सोमवार को सामूहिक अवकाश रखा और एडीए कार्यालय के बाहर धरना दिया। कर्मचारियों ने कहा कि यदि जल्द से जल्द जेईएन को बहाल नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
स्थिति गंभीर, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस विवाद के कारण अजमेर में तनाव बढ़ गया है। जहां एक ओर प्रशासन के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजपूत समाज इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।