मनीषा शर्मा।राजस्थान हाईकोर्ट ने रीट भर्ती 2021 पेपर लीक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने गहलोत सरकार द्वारा करवाई गई एसओजी जांच को सही ठहराया और सीबीआई जांच की याचिका को खारिज कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी, जिसे सरकार ने अनावश्यक बताते हुए विरोध किया। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी और नए सिरे से परीक्षा आयोजित कर अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा चुकी है।
गहलोत सरकार ने की थी परीक्षा रद्द
रीट भर्ती परीक्षा 2021 का विज्ञापन साल 2020 में गहलोत सरकार द्वारा जारी किया गया था। यह परीक्षा 26 सितंबर 2021 को आयोजित की गई थी, लेकिन परीक्षा के दिन ही पेपर वॉट्सऐप पर लीक हो गया। इसके बाद पहला केस 27 सितंबर को गंगापुर सिटी थाने में दर्ज हुआ।
जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा, जयपुर के सिंधी कैंप, मुहाना मंडी और श्याम नगर थाने में भी पेपर लीक से जुड़े मामले दर्ज हुए। इस बड़े खुलासे के बाद भाजपा ने गहलोत सरकार को निशाने पर लिया और सीबीआई जांच की मांग की। हाईकोर्ट में भी कई याचिकाएं दायर की गई थीं। लेकिन 7 फरवरी 2022 को गहलोत सरकार ने रीट लेवल-2 का पेपर रद्द कर दिया और परीक्षा फिर से आयोजित करवाई।
पेपर लीक मामले का खुलासा ऐसे हुआ
26 सितंबर 2021 को रीट परीक्षा के दौरान नेटबंदी लागू की गई थी। हालांकि, परीक्षा से पहले ही पुलिस को सूचना मिली थी कि गंगापुर सिटी में एक संगठित पेपर लीक गिरोह सक्रिय है।
जांच के दौरान सवाई माधोपुर जिले के पुलिस कॉन्स्टेबल देवेंद्र सिंह के मोबाइल में रीट का सॉल्वड पेपर पाया गया। देवेंद्र ने यह पेपर अपनी पत्नी को दिया था। जांच में सामने आया कि देवेंद्र के अलावा यदुवीर कॉन्स्टेबल, बत्तीलाल मीना और दिलखुश मीना भी इस लीक में शामिल थे। पुलिस ने देवेंद्र को हिरासत में लिया, जिसके मोबाइल के फाइल मैनेजर में 33 फोटोज में पूरा पेपर सॉल्वड मिला।
देवेंद्र ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने नाबालिग के मोबाइल में भी पेपर के फोटोग्राफ सेव किए थे। आगे की जांच में पता चला कि इस पूरे पेपर लीक का तार जयपुर स्थित शिक्षा संकुल से जुड़ा था।
सरकार ने जांच को बताया सही, हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग ठुकराई
राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्ट किया कि रीट पेपर लीक की जांच एसओजी द्वारा प्रभावी तरीके से की गई और दोषियों को पकड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
राज्य सरकार के एएजी (अतिरिक्त महाधिवक्ता) विज्ञान शाह ने अदालत में तर्क दिया कि सरकार ने पारदर्शी तरीके से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि चूंकि नई परीक्षा सफलतापूर्वक करवाई जा चुकी है और नियुक्तियां दी जा चुकी हैं, इसलिए अब किसी भी तरह की नई जांच की जरूरत नहीं।
इसके बाद, राजस्थान हाईकोर्ट ने ABVP और अन्य याचिकाकर्ताओं की सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया और गहलोत सरकार की जांच को सही ठहराया।