मनीषा शर्मा। राजस्थान में डॉक्टरों की गिरफ्तारी अब आसान नहीं होगी। गृह विभाग ने इस संबंध में नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की है, जिसमें डॉक्टरों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर अहम प्रावधान किए गए हैं।
इस नई गाइडलाइन के तहत, अब किसी भी चिकित्सक को गिरफ्तार करने से पहले संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) या पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) से मंजूरी लेनी होगी।
अस्पतालों में इलाज के दौरान अगर किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है, तो परिजन अक्सर हंगामा कर डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा देते हैं। कई बार यह शिकायतें आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर होती हैं, जिससे डॉक्टरों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब ऐसी स्थितियों को रोकने के लिए गृह विभाग ने नई नीति लागू की है।
बिना एसपी की अनुमति डॉक्टरों की गिरफ्तारी नहीं होगी
राजस्थान सरकार ने अस्पतालों में होने वाले विवादों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों की गिरफ्तारी के लिए सख्त प्रक्रिया लागू की है।
यदि किसी डॉक्टर पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगता है, तो पहले एसपी या डीसीपी से इसकी स्वीकृति लेनी होगी।
बिना उच्च स्तरीय जांच और एसपी की मंजूरी के, पुलिस डॉक्टर को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।
इससे गलत शिकायतों के आधार पर होने वाली गिरफ्तारियों पर रोक लगेगी और डॉक्टरों को निर्भीक होकर काम करने का अवसर मिलेगा।
अस्पतालों में पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग अनिवार्य
एसओपी के अनुसार, अब अस्पतालों में पुलिस पेट्रोलिंग अनिवार्य कर दी गई है।
प्रत्येक पुलिस थाना अपने क्षेत्र के अस्पतालों में नियमित गश्त करेगा।
यदि किसी डॉक्टर पर हिंसा होती है या कोई विवाद होता है, तो अस्पताल के नोडल अधिकारी की सूचना पर पुलिस को 6 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
इससे अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सकेगा।
पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी होगी अनिवार्य
अगर किसी मरीज की मृत्यु इलाज के दौरान होती है, और परिजन डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हैं, तो इस मामले में पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य होगा।
यह प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 194 के तहत की जाएगी।
इससे डॉक्टरों पर लगे झूठे आरोपों की जांच में पारदर्शिता बनी रहेगी।
पोस्टमार्टम की रिकॉर्डिंग से गलतफहमी दूर होगी और जांच प्रक्रिया निष्पक्ष रहेगी।
डॉक्टर हड़ताल नहीं कर सकेंगे, नियमों के तहत रखें अपनी बात
एसओपी में एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया गया है कि डॉक्टर या अन्य चिकित्सा कर्मी किसी भी अप्रिय घटना के विरोध में अस्पतालों में हड़ताल नहीं करेंगे।
अगर डॉक्टरों को कोई मांग रखनी है, तो वे इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकार के सामने रखेंगे।
अस्पतालों में रोगियों की चिकित्सा सेवा को किसी भी स्थिति में बाधित नहीं किया जाएगा।
डॉक्टरों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने और समाधान पाने के लिए उचित मंचों का उपयोग करना होगा।
डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सरकार का बड़ा कदम
राजस्थान में डॉक्टरों के साथ मारपीट और गैरकानूनी गिरफ्तारियों के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। डॉक्टरों के संगठनों और एसोसिएशनों ने इस मुद्दे पर लगातार आवाज उठाई थी।
गृह विभाग द्वारा लागू की गई नई एसओपी, डॉक्टरों को कानूनी सुरक्षा देने और उन्हें बेवजह होने वाली गिरफ्तारियों से बचाने के लिए बनाई गई है।