मनीषा शर्मा, अजमेर। अजमेर में स्थित आनासागर झील के पास बने सेवन वंडर को हटाने की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को छह महीने का समय दिया है ताकि वह आवश्यक कदम उठाकर आदेश का अनुपालन कर सके। यह मामला तब शुरू हुआ जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने झील के आसपास अवैध निर्माण को हटाने के आदेश दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन राजस्थान सरकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। अदालत ने सरकार को राहत देते हुए छह महीने का समय दिया, जिससे अब सेवन वंडर को तत्काल गिराया नहीं जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को छह महीने के भीतर समाधान निकालने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या अजमेर में और अधिक वेटलैंड विकसित किए जा सकते हैं। राजस्थान सरकार की ओर से मुख्य सचिव सुधांश पंत ने हलफनामा दायर किया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। अदालत ने इस हलफनामे को स्वीकार करते हुए सरकार को मोहलत दी ताकि वह वैकल्पिक समाधान निकाल सके।
फूड कोर्ट और अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया जारी
राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि उसने आनासागर झील के पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
लवकुश उद्यान में स्थित फूड कोर्ट को पहले ही ध्वस्त कर दिया गया है।
सेवन वंडर पार्क में बनी संरचनाओं में से एक को हटा दिया गया है, जबकि बाकी के स्थानांतरण की अनुमति मांगी गई है।
सरकार का कहना है कि इन संरचनाओं को झील के इकोसिस्टम के अनुसार पुनर्स्थापित किया जाएगा।
अन्नासागर झील को वेटलैंड घोषित करने की तैयारी
राजस्थान सरकार आनासागर झील को वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत वेटलैंड घोषित करने की योजना बना रही है। इसके लिए एक समिति गठित की गई है, जो छह महीने में विस्तृत अधिसूचना जारी करेगी। इस फैसले का उद्देश्य झील के पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखना और अवैध निर्माणों से उसे बचाना है। झील की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गांधी स्मृति उद्यान और पटेल स्टेडियम पर अगली सुनवाई 7 अप्रैल को
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि गांधी स्मृति उद्यान में बनी पगडंडी को हरित क्षेत्र में बदला जाएगा। यह काम दो महीने के भीतर पूरा होने की संभावना है। पटेल स्टेडियम में बने इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को नहीं हटाया जाएगा, क्योंकि यह सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया है। इस संबंध में अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी, जिसमें अदालत सरकार की ओर से उठाए गए अन्य कदमों पर भी विचार करेगी।
पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए गए कदम
राजस्थान सरकार ने आनासागर झील और उसके आसपास के पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए कई उपाय किए हैं:
झील की जल गुणवत्ता सुधारने के लिए 4 एयरेटर्स और 8 फव्वारे लगाए गए हैं।
प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) की एक टीम को अध्ययन और सिफारिशें देने के लिए नियुक्त किया गया है।
NGT के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
यह मामला वर्ष 2023 में तब शुरू हुआ जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने आनासागर झील के आसपास अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया। इसके खिलाफ राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को छह महीने के भीतर अनुपालन करने का निर्देश दिया है।
क्या होगा अगला कदम?
अब राजस्थान सरकार को यह तय करना होगा कि सेवन वंडर संरचनाओं को स्थानांतरित किया जाए या उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाए। इसके साथ ही, 7 अप्रैल को गांधी स्मृति उद्यान, पटेल स्टेडियम और अन्य संरचनाओं को लेकर होने वाली अगली सुनवाई में सरकार को और अधिक स्पष्टीकरण देने होंगे।