शोभना शर्मा। राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर के महाबार गांव क्षेत्र में एक संदिग्ध पक्षी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। यह पक्षी ग्रामीणों को मेवाणियों की ढाणी के पास धोरों में विचरण करता दिखा। पक्षी के पैर में सिल्वर रंग की रिंग जैसी डिवाइस लगी हुई थी, जिस पर नंबर और कुछ अंग्रेजी अक्षर लिखे हुए थे। इस घटना के बाद से स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां पक्षी के माध्यम से जासूसी की संभावना की जांच में जुट गई हैं।
संदिग्ध पक्षी का विवरण और ग्रामीणों की सतर्कता
महाबार गांव के निवासियों ने इस पक्षी को सबसे पहले सुबह के समय देखा। पक्षी के पैर में लगी डिवाइस के कारण ग्रामीणों को इसकी संदिग्धता का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और वन विभाग को दी। ग्रामीणों ने पक्षी को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। अब यह पक्षी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है।
डिवाइस के सिल्वर रिंग पर लिखे नंबर और अक्षरों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह संदेह जताया जा रहा है कि पक्षी पाकिस्तान की सीमा से उड़कर आया हो सकता है। हालांकि, पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जांच कर रही है।
पाकिस्तान द्वारा जासूसी के लिए पक्षियों और गुब्बारों का उपयोग
भारत-पाकिस्तान सीमा पर जासूसी गतिविधियां कोई नई बात नहीं हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां अक्सर भारतीय सीमाओं की टोह लेने के लिए पक्षियों और रिमोट-नियंत्रित डिवाइसों का इस्तेमाल करती हैं।
करीब एक महीने पहले, राजस्थान के जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ इलाके में पाकिस्तान से उड़कर आया एक एंटीनुमा गुब्बारा मिला था। इसी तरह, पिछले कुछ वर्षों में सरहद के पास से संदिग्ध बाज और अन्य लंबी उड़ान भरने वाले पक्षी भी पकड़े गए हैं। इनका उपयोग जासूसी के लिए किया जाता है, जिनमें कैमरे और डिवाइस लगाई जाती हैं।
जांच के प्रमुख पहलू
संदिग्ध पक्षी की पहचान और डिवाइस की प्रकृति का पता लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां इसे गहनता से जांच रही हैं। रिमोट कंट्रोल डिवाइस का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह पक्षी वास्तव में कहां से आया है और इसके इस्तेमाल का मकसद क्या है।
- डिवाइस का विश्लेषण: सिल्वर रिंग पर लिखे नंबरों और अक्षरों को डिक्रिप्ट किया जा रहा है।
- पक्षी की प्रजाति की पहचान: यह जानने का प्रयास हो रहा है कि यह पक्षी किसी विशेष प्रजाति का है या इसे प्रशिक्षित किया गया है।
- जासूसी उपकरणों की तलाश: पक्षी के शरीर पर छिपाए गए किसी अन्य उपकरण की जांच की जा रही है।
- सीमावर्ती निगरानी में सुधार: घटना के बाद भारतीय सीमाओं पर सुरक्षा और निगरानी को और अधिक मजबूत किया गया है।
पूर्व की घटनाएं और उनकी प्रासंगिकता
यह पहली बार नहीं है जब सरहदी इलाकों में जासूसी के लिए पक्षियों या डिवाइस का इस्तेमाल किया गया हो। इससे पहले भी कई बार ऐसे पक्षी और गुब्बारे पाए गए हैं।
- जैसलमेर मामला: हाल ही में जैसलमेर के मोहनगढ़ में एक एंटीनुमा गुब्बारा मिला था, जो पाकिस्तान से आया था।
- बाज और अन्य पक्षी: लंबे समय से सरहदी इलाकों में संदिग्ध पक्षी देखे जाते रहे हैं, जिनके साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जुड़े होते हैं।
ग्रामीणों की सतर्कता ने रोका संभावित खतरा
महाबार गांव के ग्रामीणों की सतर्कता के कारण यह मामला उजागर हुआ। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि सीमावर्ती इलाकों के निवासियों को भी सतर्क रहना चाहिए। सीमावर्ती गांवों में ऐसे संदिग्ध पक्षी या उपकरण दिखाई देने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करना आवश्यक है।