मनीषा शर्मा, अजमेर। संभाग के सबसे बड़े जेएलएन अस्पताल में सफाई कर्मियों की हड़ताल के कारण हालात बिगड़ गए हैं। 150 सफाई कर्मी पिछले दो दिनों से बकाया मानदेय और अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिससे अस्पताल की सफाई व्यवस्था ठप हो गई है। हड़ताल के कारण आपातकालीन यूनिट, ऑपरेशन थिएटर और अन्य वार्डों में गंदगी बढ़ गई है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सफाई कर्मियों की प्रमुख मांगें
हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को प्रशासन के सामने रखा है:
बकाया मानदेय जारी किया जाए – ठेका कंपनियों द्वारा वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान नहीं किया गया है।
पीएफ और ईएसआई राशि का भुगतान हो – इंदौर की ठेका फर्म प्रथम नेशनल सिक्योरिटी ने 18 महीने के पीएफ का 34,50,024 रुपए और ईएसआई का 5,67,504 रुपए का भुगतान नहीं किया है।
बढ़ी हुई दरों का एरियर दिया जाए – 1 जनवरी 2023 से 31 जुलाई 2023 तक सफाई कर्मियों को बढ़ी हुई दरों के हिसाब से 26 रुपए प्रतिदिन प्रति व्यक्ति भुगतान नहीं किया गया है।
नए ठेकेदारों द्वारा भी भुगतान किया जाए – वर्तमान में सफाई का ठेका बिलीव सॉल्यूशन सर्विसेज और न्यू पालम विहार, गुरुग्राम के पास है। इन कंपनियों का भी एरियर बकाया है।
2014-15 में वैकल्पिक व्यवस्था के दौरान 1 माह 8 दिन का वेतन जारी किया जाए।
हड़ताल से अस्पताल की सफाई व्यवस्था चरमराई
हड़ताल के चलते अस्पताल में चारों ओर गंदगी का अंबार लग गया है। सबसे ज्यादा असर इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और जनरल वार्ड में देखा जा रहा है। बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में देरी हो रही है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।
अस्पताल प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सफाई कर्मियों की मांगों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। प्रशासन ने सफाई कर्मियों से हड़ताल खत्म करने और जल्द से जल्द ड्यूटी पर लौटने की अपील की है।
सफाई कर्मचारियों की चेतावनी – जब तक वेतन नहीं मिलेगा, काम नहीं करेंगे
हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सभी बकाया राशि का भुगतान नहीं होता, वे काम पर नहीं लौटेंगे। उनकी मांग है कि ठेकेदारों को तुरंत भुगतान करने का आदेश दिया जाए, जिससे उन्हें उनका वेतन और अन्य लाभ मिल सकें।
सफाई कर्मियों की हड़ताल से मरीजों को हो रही दिक्कतें
अस्पताल के कई वार्डों में कूड़ा-कचरा जमा हो गया है।
बायो-मेडिकल वेस्ट के समय पर निस्तारण न होने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
मरीजों और उनके परिजनों को गंदगी और बदबू के बीच रहना पड़ रहा है।
टॉयलेट और वॉशरूम की सफाई न होने से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।
क्या हो सकता है समाधान?
प्रशासन को सफाई कर्मियों के बकाया भुगतान की प्रक्रिया तेज करनी होगी।
स्थायी सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति पर विचार किया जाए, जिससे हर बार ठेकेदारों की मनमानी से कर्मचारियों को परेशानी न हो।
अस्पताल प्रबंधन को वैकल्पिक सफाई व्यवस्था करनी होगी, ताकि मरीजों को असुविधा न हो।
ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उन्हें भुगतान करने के लिए बाध्य किया जाए।